क्या मोदी की सरकार 2019 मे फिर आएगी , और कब बनेगा राम मंदिर ?

नरेन्द्र दामोदर मोदी किसी फिल्म मे दिखाए गये बड़े नेता से कम नही हैं जिसका हर कोई दुस्मन दिखाई देता | जैसे फिल्म के खलनायक एक बड़े ईमानदार नेता को आने नही देना चाहते वैसे ही दिखाई देता है विपक्ष |

will narendra again come in 2019

क्या मोदी की सरकार 2019 मे फिर आएगी , और कब बनेगा राम मंदिर ?

2014 चुनाव मे NDA की कुल सीट्स थी 336. अकेले BJP ने ही कुल 282 सीट्स जीते थे | पिछले 4 साल मे मोदी की लोकप्रियता कम होती दिखाई नही दे रही | लगातार प्रदेश चुनाव में भी भाजपा अपना प्रभुत्व दिखाते जा रही है | और वो भी सिर्फ़ मोदी के ही नाम पर , इसका ताज़ा उदाहरण है कर्नाटका चुनाव |

नरेन्द्रा मोदी का जन्म 17 september 1950 मे मेहसाना , भारत मे हुआ था , जन्म का समय लगभग 11 बजे | और अगर आप ज्योतिस पर विस्वास करते हैं तो 2019 मे कभी भी उनका समय खराब तो नज़र नही आ रहा और अगर आपको ज्योटिस मे विस्वास नही है तो भी उनका 2014 के बाद इस तरह से बढ़ता हुआ कद इस बात को बार बार कह रहा है के विपक्ष और कुछ पूर्णा रूप से देशद्रोही तत्वों क अलावा बहुत कम ही देशभक्त नज़र आते हैं जो मोदी का विरोध कर रहे हों |

कमजोर विपक्ष

और मोदी के इस बढ़ते कद का सबसे प्रमुख कारण है कमजोर विपक्ष | पूरा का पूरा विपक्ष पहले से कमजोर कॉंग्रेस से जुड़ता जा रहा है | और इस पूरे कारवाँ का नायक कौन है माननीया श्री राहुल गाँधी| मैं पहले यह सोचता था के भाजपा अपने चुनावी हथियार के तौर पर “पप्पू” गढ़ा है | पर बीते दिनो मैने कयी बार राहुल गाँधी को बोलता हुआ सुना | ये व्यक्ति राजनेता क समान फिलहाल तो नज़र नही आता |

shashi tharoor

और अब भारत मे चुनाव में लोग एक चेहरे एक नायक को देखना पसंद करने लगे हैं | इस तरह तो विपक्ष की मनसा पूर्ण होती नज़र नही आ रही | अब मुख्य विपक्ष कॉंग्रेस के पास एक और बड़ा नाम नज़र आता है वह है शशि थरूर | ये नाम तो बड़ा दिखाई दे रहा है पेर ईसमे कुछ खास दम नहीं | पहला तो सुनंदा पुष्कर की आत्महत्या मे उनके नाम होने का संदेह उनके प्रधानमंत्री पद के लिए विपक्ष का उम्मीदवार होने मे तुरंत ही संदेह ला देता है |

और दूसरा प्रमुख कारण उनका अछा हिन्दी वक़्ता ना होना | अब वो दिन गये जब लोग सोनिया के “गाँधी” होने से उनकी टूटी फूटी हिन्दी सुन लेते थे | ये दोनो ही कारण शशि थरूर को भी एक बुधीजीवी होने के बावजूद उनका नाम कम से कम 2019 चुनाव मे प्रधानमंत्री पद का उम्मेदवार होने से रोक दे रहे हैं | इनमे से दूसरा कारण कुछ ऐसा है के उम्मीदवार घोसित होने पर भी उनकी लोकप्रियता को सीमित रखेगा |

अयोध्या का राम मंदिर मुद्दा

यह एक संवेदंसील मुद्दा है भाजपा चुनाव के पहले ऐसी अच्छी इस्तिथि मे अपने पुराने जिन को वापस तो निकाल सकती है पर वो इसमे कोई अहम कदम नही उठाने वाली क्यूकी इससे किसी तरह की हिंसा की बहुत ज़्यादा उमीदे हैं जो पूरे विश्व मे भारत की छवि को तो नुकसान पहुँचा ही सकता है साथ ही साथ चुनाव मे फाय्दे की वजह नुकसान भी पहुँचा सकता है | तो इस इस्तिथि में भाजपा राम मंदिर पर कोई भी बड़ा कदम उठाती नज़र नही आ रही | तो राम मंदिर बनने का समय अधर में ही रहने का अनुमान है |