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झाड़ू लगाने का फ़ैशन

झाड़ू लगाने का फ़ैशन

कुछ सालों से झाड़ू लगाना और झाड़ू लगाते हुए फ़ोटो खि‍चाना हमारे देश में फ़ैशन सा बन गया है।

जब 2014 में नरेन्द्र मोदी ने भारत के प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली थी तो अपने साथ फ़ैशन की एक लम्बी लिस्ट साथ लेकर आए थे, जैसे कि मोदी-जैकेट। यूँ तो ये जो जैकेट या कोटी है, हमारे देश में एक ज़माने से राजनेता पहनते आ रहे हैं। पर पता नहीं क्यूँ, मोदी के नाम से देश ही नहीं पूरी दुनिया में प्रचलित हो गई। देश के छोटे शहरों और कस्बों में तो ये राष्ट्रीय पहनावा ही बन गई। ये जैकेट पहनकर लोग ख़ुद को देश का प्रधानमन्त्री ही समझने लगते हैं। यहाँ तक कि ब्रिक्स समिट 2016 जो कि गोवा में सम्पन्न हुई थी, अंतिम दिवस के रात्रिभोज में सम्मिलित हुए पाँचों देशों के राजनेता मोदी जैकेट में ही नज़र आए। ख़ैर यह बात हमारा मुद्दा नहीं है।

झाड़ू लगाने का फ़ैशन

हम यहाँ बात करने वाले हैं झाड़ू लगाने के फ़ैशन की।

अक्टूबर 2014 में प्रधानमन्त्री ने स्वच्छता मिशन की शुरुआत की। बहुत ही सराहनीय कदम है, मुझे लगता है भले लोगों ने इस मिशन में योगदान दिया हो या नहीं पर कोई विरला ही होगा जिसने इसकी आलोचना की हो। सामने आकर बहुत सी नामचीन हस्तियों ने इसका समर्थन भी किया और साथ ही जनता में इसके प्रति जागरूकता फैलाने की भी कोशिश की। तमाम साधारण व असाधारण लोगों ने इस मिशन में बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। एक साधारण इंसान ने ही मुम्बई में एक बीच की सफाई का जिम्मा उठाया और इस सफाई अभियान में कामयाब हुआ। तो इसके उलट कुछ ऐसे लोग भी हैं जो झाड़ू लगाते हुए फ़ोटो खिचाते हैं, भले ही उनकी डुलाई गई प्यारी झाड़ू से एक तिनका भी अपनी जगब से न हटा हो। बस झाड़ू व कैमरे पर इतना एहसान करके वह सामान्य जन से सेलिब्रिटी बन जाना चाहते हैं। यह वही हैं जो सालों से सड़क पर कूड़ा डालते आ रहे हैं, पर एक दिन झाड़ू लगा कर स्वच्छता अभ्यान के सहभागी बन जाते हैं।

झाड़ू लगाने के फ़ैशन का असर

इस स्वच्छता मिशन का यही सच मुझे बहुत परेशान करता है। इसका एक रूप यह भी है किसी बड़े अफ़सर या उनके जैसे ही लोगों का झाड़ू लगाकर सफाई करना। इसकी पहली अखरने वाली बात: हमारे देश में कार्यपालिका को कई स्तर पर बाँटा गया है, जिसमें बड़े जिम्मेदार अफ़सर से लेकर साफ-सफाई करने वाले, पानी पिलाने वाले कर्मचारी तक शामिल हैं। इस कार्यपालिका में अगर सभी अपना काम पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करें तो किसी तरह की ख़ामी आएगी ही नहीं। पर जो तस्वीर सामने आ रही है, उसमें उच्च स्तरीय लोग झाड़ू लगाते और सफाई करते नज़र आ रहे हैं। मेरा एक सवाल है उनसे कि क्या वो अपने उत्तरदायित्वों के लिए हमेशा निष्ठावान रहे हैं, क्या उन्होंने अपने हिस्से के सारे काम ढंग से किए हैं, क्या जब कभी उनके किसी काम पर सवाल उठा तो सफाई कर्मचारियों ने आकर उनका काम किया, इस जैसे तमाम सवाल। मैं उनसे कहना चाहती हूँ कि आपकी अपनी ख़ुद की बहुत सी जिम्मेदारियाँ हैं, आप उन्हें पूरा करें। आपको निष्ठावान और ईमानदार देखकर अपेक्षाकृत कम पढे-लिखे लोग स्वयं ही अपना काम ढंग से करने लगेंगे। आपके पद की एक छद्म जिम्मेदारी यह भी है कि आप अपने जूनियर्स के प्रेरणास्त्रोत भी बने रहें।

दूसरी बात: अगर सब लोग ही झाड़ू लगाने लगेंगे तो जो झाड़ू लगाते थे, जिनके पास आपकी तरह ढेर सारे कॅरियर ऑप्शन्स नहीं हैं वो क्या करेंगे। उनकी रोजी-रोटी कैसे चलेगी, वो कहाँ से पैसे कमाएंगे। आप कुछ मत करिए बस उनके बारे में सोचिए। अब यहाँ यह दलील देने की ज़रूरत नहीं है कि आप तो केवल जागरूक करने के लिए कर रहे हैं। इसका उत्तर मेरी पहली बात में है।

झाड़ू लगाने का फ़ैशन

झाड़ू लगाने के फ़ैशन के फायदे

तीसरी बात: एक तो, जो लोग भी फ़ोटोज़ में झाड़ू लगाते नज़र आते हैं उनके घरों में पक्के से इस काम के लिए कर्मचारी होते हैं और ये बात 90 प्रतिशत केस में सच है। दूसरे जब भी कोई अपने घर में भी सफाई करने की सोचता है, तो उसके लिए पहले वो सूट-बूट पहन के तैयार नहीं होता है। पर ऐसे लोग बकायदा नहा-धो के सूट-बूट में तैयार होकर घर से निकलते हैं, उसके बाद ऑफि़स पहुँचकर झाड़ू लगाने लग जाते हैं। अगर वाकई गन्दगी साफ कर रहे थे तो क्या इनपर और इनके कपड़ों पर इस सफाई कार्यक्रम का कोई असर नहीं होता? उलझन नहीं होती ऐसे तैयार होकर सफाई करने में? कैसे इतने महान काम कर लेते हैं ये लोग। मेरा भी मानना है कि आप जहाँ रहें, वो जगह साफ-सुथरी रखें पर क्या इसके लिए झाड़ू लगाना परम आवश्यक है। आप कूड़ा न फैलायें बाकी तो हर ऑफि़स में झाड़ू लगाने वाले लोग होते हैं।

तो सब मिलाकर बात यह है कि आप झाड़ू ज़रूर लगाएं, बहुत अच्छी बात है पर उसके साथ ही यह भी ठान लें कि कमसकम सार्वजनिक स्थान पर कूड़ा नहीं फेंकेंगे, गन्दगी नहीं फैलाएंगे। सबसे ज़रूरी यह कि कहीं भी अपने शरीर की गन्दगी, चाहे वो थूक हो या मल-मूत्र उत्सर्जित नहीं करेंगे। मेरा अवलोकन तो यही कहता है कि हमारे देश में चहुँओर फैली गन्दगी की वजह सफाई का काम न होना नहीं बल्कि हमारी गन्दगी फैलाने की आदत है। यहाँ जितनी भी बात आपको समझ आई है या मेरी जिन भी बातों से आप इत्तफ़ाक रखते हों, उसे जहाँ तक और जितने भी लोगों तक हो सके पहुँचायें।

13 thoughts on “झाड़ू लगाने का फ़ैशन

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