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क्या कोरोना वायरस से लड़ने के लिए टाटा ₹1500 करोड़ खर्च करेंगे ?

क्या कोरोना वायरस से लड़ने के लिए टाटा ₹1500 करोड़ खर्च करेंगे ?

जब से कोरोना वायरस को लेकर पूरे देश में लॉकडाउन घोषित हुई है तभी से देश के कई दिग्गज, फिल्म स्टार, खिलाड़ी, और बिजनेसमैन यहां तक कि आम जनता भी मदद के लिए आगे आ रही है।

ऐसे में रतन टाटा कैसे पीछे रह सकते हैं! कहा जाता है कि टाटा ट्रस्ट के ज्यादातर कमाई ट्रस्ट में ही चली जाती है।

28 मार्च को टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन रतन टाटा ने ₹500 करोड़ रुपए देने की घोषणा की।

Tweet from Ratan N Tata


रतन टाटा ने ट्वीट करते हुए कहा कि “कोविड-19 संकट सबसे चुनौतियों में से एक है टाटा ट्रस्ट और टाटा समूह की कंपनियां देश के जरूरत के लिए अतीत में आगे बढ़ी है इस समय पर, समय की आवश्यकता अन्य समय से अधिक है।”

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन कोरोना वायरस के इस महामारी से निपटने के लिए ₹1000 करोड़ और देने की घोषणा की।

Tata sons chairman N chandrasekharan

जब भी बुरा दौर आया है रतन टाटा और टाटा समूह की कंपनियां हमेशा मदद के लिए आगे जरूर आई हैं।

आज पूरा देश रतन टाटा की और टाटा समूह की कंपनियों के गुणगान करते नहीं थक रहा है।

26/11 के मुंबई हमले में जितने भी लोग घायल हुए थे, यहां तक कि ताज होटल के आसपास जो ठेले वाले थे उनका भी इलाज रतन टाटा ने कराया था और अपने कर्मचारियों को पूरा-पूरा सैलरी दिया था।

टाटा ग्रुप के कंपनियों का शेयर में से 0.18% ही रतन टाटा के पास है। अगर 65-66% शेयर रतन टाटा के पास होता तो वह एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति होते। लेकिन, रतन टाटा और टाटा ट्रस्ट हमेशा देश के लिए काम करते हैं, देश के लोगों के लिए काम करते हैं और इस बात को उन्होंने कई बार साबित भी कर दिया है।

2010 में, टाटा समूह की कंपनियों और टाटा चैरिटीज़ ने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एक कार्यकारी केंद्र के निर्माण के लिए 50 मिलियन डॉलर का दान दिया।
टाटा संस के अध्यक्ष एमेरिटस, रतन टाटा के बाद कार्यकारी केंद्र का नाम टाटा हॉल रखा गया है। कुल निर्माण लागत 100 मिलियन डॉलर अनुमानित की गई।
टाटा हॉल एचबीएस परिसर के उत्तर-पूर्व कोने में स्थित है, और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के mid-career Executive Education program के लिए है।
यह सात मंजिला लंबा है, और लगभग 155,000 वर्ग फुट है। इसमें अकादमिक और बहुउद्देश्यीय स्थानों के अलावा लगभग 180 बेडरूम हैं। टाटा संस के टाटा चेयरमैन के रूप में उभरने के बाद कार्यकारी केंद्र को टाटा हॉल नाम दिया गया है।

2014 में, टाटा समूह ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे का समर्थन किया और सीमित संसाधनों के साथ लोगों और समुदायों की आवश्यकताओं के अनुकूल डिजाइन और इंजीनियरिंग सिद्धांतों को विकसित करने के लिए टाटा सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एंड डिज़ाइन (TCTD) का गठन किया। उन्होंने संस्थान को million 950 मिलियन दिए जो कि अपने इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा दान था।

यह इतिहास दर्शाता है कि टाटा हमेशा देश के लिए और लोगों के लिए काम करता है।

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